मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023

पर्चा कृषि मुद्दों पर

 पर्चा कृषि मुद्दों पर

हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति हरियाणा।

आदरणीय साथियों, नमस्कार!

                           भारत देश कृषि प्रधान देश कहा जाता रहा है। इसमें हरियाणा प्रदेश अपना प्रमुख स्थान रखता है। विकास क्रम में कृषि उत्पादन प्राथमिक उत्पादन माना जाता है । विकास की सीढ़ी पर अभी हम काफी पिछड़े हुए हैं। यानी सामुदायिक विकास, कृषि उत्पादन के माध्यम से नहीं हो पाया है । आजादी से पहले भी और आजादी के बाद भी इस क्षेत्र ने भेदभाव को ही झेला है। हरित क्रांति के माध्यम से पूंजी ने ही अपने हिसाब से कृषि मॉडल डिजाइन किया। इसमें समुदाय का तो शोषण ही छिपा था। इस प्रकार बहुतेरे कारणों से अनेकों बदलाव कृषि और समुदाय के संबंधों में आए हैं।

                              तथाकथित आधुनिक खेती (मॉडर्न एग्रीकल्चर ) ने प्राकृतिक संसाधनों व मानव शक्ति का दोहरा शोषण किया है।  हालात बद से बदतर हो चले हैं। उत्पादन बढ़ने की बजाए अब घट रहा है । अनाज की गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। पर्यावरण का बहुत नुकसान सामने आने लगा है। रोजगार लगातार घट रहे हैं शेष रोजगारसुदा लोगों की भी आमदनी निरंतर घट रही है । इस क्षेत्र पर निर्भर कारीगरों ,मजदूरों और सेवा प्रदाताओं के जीवन यापन की मुश्किलें बढ़ीं हैं। और सबसे बड़ा नुकसान किसानों की आत्मनिर्भरता पर पड़ा है । बीज, खाद, मशीन, दवाई, धनराशि, ऊर्जा में बिजली और डीजल आदि सभी आवश्यक तत्व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में चले गए हैं। यह परनिर्भरता सामाजिक भेदभाव को जन्म देती है।

इन हालातों को सुधारने की बजाए दोहन की प्रक्रियाओं को तेज करते हुए आखिरी बूंद तक निचोडने  के प्रयास ही  दिखाई देते हैं। 3 नए कृषि कानून और बिजली बिल 2021 इन ही नीतियों को स्पष्ट करते हैं । आम आदमी का सामाजिक -आर्थिक जीवन गहरे संकट में फंस गया है।

                        इन परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में हिंदुस्तान के ज्ञान विज्ञान आंदोलन ने समीक्षाएं करके निष्कर्ष निकाले हैं ।सक्रिय हस्तक्षेप का खाका तैयार किया है। पहला ,जनसाधारण को तथ्यात्मक जानकारियां देना और जागरूक करना होगा । दूसरा इसके विकल्पों पर विमर्श करना जो वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अर्थशास्त्रियों से नेटवर्क स्थापित करने से संभव होगा। कुछ ऐसे कामों की संभावनाओं को तलाश करना जिसमें नए तौर-तरीकों से रोजगार उत्पन्न हो सके, यानी तथाकथित आधुनिक खेती (पूंजी वाली खेती )का विकल्प पैदा किया जा सके।

              हरियाणा में इसकी संगति में ही पिछले चार-पांच सालों से कृषि क्षेत्र की समझ विकसित करने के निरंतर प्रयास हैं।अब सांगठनिक तौर पर कृषि क्षेत्र में दखल के लिए कृषि कोर गठित किया है। नीतिगत व तकनीकी हस्तक्षेप शुरू किया है । इस बीच डा सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन से नेटवर्किंग भी की है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय , हिसार और  हरियाणा कृषि विभाग के विशेषज्ञों और विस्तार अधिकारियों की मदद से सीमित वैचारिक विमर्श और वैकल्पिक कृषि उत्पादन तकनीक पर काम शुरू किया है।


साथियों, 

            खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और बनाए रखने के लिए टिकाऊ विकास की अवधारणा से HGVS हरियाणा काम करेगी ।सांगठनिक और सामूहिक जनशक्ति से इस क्षेत्र में दखल की पहल कदमी हम सब लेंगे। सामाजिक आर्थिक न्याय के पक्ष में काम करेंगे। वर्तमान संकटग्रस्त परिदृश्य भी बदलेंगे ।आओ हम सब मिलकर बहुआयामी कोशिशें करें । 

                     राज्य कार्यकारिणी 

 हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, हरियाणा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें