किसान संवाद एवं विचार गोष्ठी 26 मार्च 2022 शनिवार को जाट धर्मशाला में आयोजित की गई।
वार्षिक राज्य स्तरीय इस आयोजन में निम्न विषयों को संबोधित किया गया।
1. नरमा कपास में गुलाबी सुंडी का प्रकोप व बचाव।
2. वैकल्पिक कृषि विधियां (P Q N K व अन्य)।
3. जहर मुक्त खेती और उसका सर्टिफिकेशन।
पहला सत्र:
शुरुआती संबोधन
डा बलजीत सिंह भ्याण : ने कहा कि डॉ सुरेंद्र दलाल ने ट्रिब्यून में छपे एक लेख को चुनौती के रूप में लिया। प्राकृतिक जीवन यापन की बात को सामने रखा ।कीटों की पहचान की। उनके जीवन चक्र का अध्ययन किया ।शाकाहारी और मांसाहारी कीटों की पहचान की। इनके आपसी संबंध कीट का पौधों से और शाकाहारी का मांसहारी से संबंध को पढ़ा और समझा। निष्कर्ष के तौर पर पाया कि जहर छिड़कने से कीटों की संख्या में असंतुलन पैदा होता है। बीमारियां घटने की बजाय बढ़ती हैं। किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है ।सप्रे का खर्च बढ़ा। पैदावार कम और जहरीला भोजन आदि। स्वास्थ्य और पैसे का नुकसान उठाना पड़ता है। जहर मुक्त खेती ही विकल्प है ।
कीट साक्षरता मिशन की निरंतर क्लासों से हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के इलावा इका -दुका किसान अन्य राज्यों से भी शामिल होते रहते हैं।
हरियाणा में पिछले साल ऑनलाइन क्लासें ही ज्यादा लग पाई। कुछ ऑफलाइन क्लास से भी लगाने की कोशिश की गई। गुलाबी सुंडी ने कहर बरपाया ।इसकी समीक्षा जींद में किसान सम्मेलन में भी की गई है। अनेकों कारण सामने आए हैं ।लेकिन किसी प्रकार के स्प्रे का असर इसकी रोकथाम के लिए नहीं हो सकता है। बीटी कपास बीज भी फेल हुआ है। वैकल्पिक विधियों में देसी कपास की बिजाई, मिश्रित खेती करना और कपास की बिजाई की विधियां बदलना जैसे पौधों से पौधों की और लाइन से लाइन की दूरी बढ़ाना आदि ।कपास की बिजाई घटाकर अन्य फसलों दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बिजाई करना। कुछ सब्जियां भी लगाई जा सकती हैं।
डॉ सुरेंद्र दलाल के द्वारा बताए रास्ते पर आगे बढ़ते हुए हमने पाया कि पौधों में बीमारियों का बढ़ना पोषक तत्वों की कमी भी एक मुख्य कारण है अतः मृदा स्वास्थ्य( जमीन की सेहत) की जांच और फिर उसके सुधार के उपायों का अपनाया जाना है। पिछले साल हमने बहुत सारी क्लासों में कदम दर कदम इसको समझा है। मुख्य पोषक और गौण तत्वों की पहचान और खेती में उनके उपयोग को समझा है ।कार्बन पदार्थ के महत्व को रेखांकित किया गया । तापमान की अहम भूमिका बीज के अंकुरण होने से लेकर फसल पकने तक नोट की गई है ।मिट्टी की सतह के नीचे जैविक प्रक्रियाओं को समझा है और मुख्य कारक के रूप में नोट किया है। कुछ किसान बहन भाइयों ने इस दिशा में अच्छा काम किया है ।लेकिन आर्थिक लाभ से आज भी वंचित हैं ।इसका मुख्य कारण कारपोरेट द्वारा मार्केट पर कब्जा होना पाया है। आज इस पर भी हम चर्चा करेंगे ।हमारी दिशा "सस्ती खेती ,टिकाऊ खेती और वैज्ञानिक खेती " की ही रहेगी। भय और भ्रम से किसान को मुक्त कराना है। सामाजिक और आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाना है। जहर मुक्त थाली और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखना है। किसान बहकावे में ना आए ।आंख मूंदकर विश्वास ना करें। प्रयोग करके खुद देखें ।वैज्ञानिक खेती वैज्ञानिक मानसिकता से ही जुड़ी हुई है ।
किसान को Cheat करना आसान है ,Teach करना बड़ा मुश्किल काम है। किसान और कारपोरेट की लड़ाई को समझें। अभी तक किसान और कीट की लड़ाई करवाई थी कारपोरेट ने। अब लड़ाई कारपोरेट से जीतनी है।
१ . डॉ राजवीर सिंह सांगवान
गुलाबी सूंडी पर पीपीटी के द्वारा जीवन चक्कर को समझाया। कपास की वैरायटी और इनकी खासियतों बारे बताया। बिजाई का समय और बीज का चुनाव विशेष महत्व रखता है। प्रबंधनात्मक ही उपाय है। कीटों और बीजों का संरक्षण करना है।
२. रणबीर मलिक कीटाचार्य ने नरमा और देसी दोनों प्रकार की कपासों का अनुभव साझा किया ।उन्होंने कहा कि स्थानीय वैरायटी ही बीमारियों से लड़ने में सक्षम हैं ।पोषक तत्वों का विशेष महत्व है। गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। वातावरण अनुकूलता पैदावार पर प्रभाव डालती है ।केमिकल खेती से किसान बर्बादी की राह पर है आज हमें खरीदारों की जरूरत भी है ।वर्तमान बाजार प्रणाली का विकल्प चाहिए।
३. जयपाल पुनिया ब्याणा खेड़ा: ने बताया कि पिछले 8 साल से कीट साक्षरता मिशन से खेती की कोशिश कर रहा हूं। अनेकों प्रशिक्षण लिए हैं ।प्रयोग किए हैं। अभी हमारी शुरुआत है। खेती एक बहुआयामी काम होने की वजह से पैदावार और उसको लाभकारी मूल्य मिलने में अनिश्चितता बनी रहती है ।हमें वैकल्पिक खेती की राह पर बढ़ना है ।मार्केट भी खुद ही तैयार करनी है ।जमीन का स्वास्थ्य और पानी का प्रबंधन इसके भी वैकल्पिक रास्ते ढूंढने हैं। पिकनिक विधि शुरू की है अन्य विधियों के साथ-साथ।
पंकज माचरा बन मंदोरी: ने बताया कि कीट साक्षरता मिशन की क्लासों और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से निरंतर जुड़े रहे हैं। पिकनिक विधि जो आसिफ शरीफ की विधि है से दो फसलें ली हैं। पूरे संसाधन उपलब्ध नहीं हैं कुछ फसलों में ही प्रयोग शुरू किए हैं।
सुरजीत बाना भट्टू : मैंने भी काजला में पिकनिक विधि से खेती शुरू की है। ठीक है पूरे तौर पर अपनाने में समय लगेगा मल्चिंग के लिए सामान उपलब्ध नहीं है।
इंजीनियर अशोक कुमार पंजाब: खेती विरासत मिशन ,जीरो बजट खेती ,पालेकर विधि, श्री विधि अनेक प्रयोग किए हैं ।पर करके देखें फिर विश्वास करें। वैज्ञानिक विधि ही कारगर है। कृषि से संबंधित बहुत सारा साहित्य उपलब्ध है उसका अध्ययन जरूर करें और प्रयोग करें ।अनेक सरकारी योजनाओं बारे जानकारी जिसमें मनरेगा और आत्मा स्कीम भी शामिल है को भी समझें।हमें किसी के फार्मूले नहीं चाहिए। वैज्ञानिक तौर तरीकों से काम लेना है ।पैदावार बढ़ाई जा सकती है ।यह हमारा तजुर्बा है ।हमें फसलों की विविधीकरण की बात माननी पड़ेगी।
डॉ राजेंद्र चौधरी : कृषि उत्पादन में वर्तमान तरीकों को बदलना ही पड़ेगा ।पानी लगाने के तरीकों से लेकर देशी खाद बनाने के तरीकों तक सब कुछ बदलना पड़ेगा एक फसली चक्र को छोड़कर बहु फसली चक्र अपनाना होगा ।कारपोरेट का ध्यान फोर्टीफाइड फूड्स फार्मूला है । हमें कृषि उपज में ही गुणवत्ता पैदा करनी है ।और यह संभव है। ऐसा प्रयोग से सिद्ध किया गया है। क्यूबा में कारपोरेट खेती को छोड़कर सहकारी और जैविक खेती की और बढ़ रहे हैं ।टिकाऊ खेती बन रही है ।जैविक खेती से खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता बढी है। क्यूबा मॉडल: "एक्सीडेंटल रिवॉल्यूशन -ऑर्गेनिक सॉल्यूशन" बना है। देर -सवेर हमें भी अपनाना ही पड़ेगा।क्योंकि खनिज तेलों ,गैस और कोयले का भंडार तो सीमित है।उसे खत्म होना ही है।समय रहते सचेत हो जाएं।
डॉ रामनिवास कुंडू (पहले सत्र के अध्यक्ष ): ने कहा कि "गांव का पैसा गांव में ही कैसे रहे"? यह चुनौती है ।कारपोरेट का अगला निशाना जमीन की लूट करने पर है। क्योंकि बीज, खाद ,मशीन और बाजार पर तो कारपोरेट का कब्जा पहले ही हो चुका है ।केमिकल खेती से पर्यावरण और मिट्टी बेशक खराब हो और लोगों का स्वास्थ्य भी खराब हो उन्हें तो अधिकतम मुनाफा चाहिए ।अमेरिका में तो किसान 1% से भी कम है और औद्योगीकरण बहुत पहले हो चुका है। भारत में करोड़ों किसान हैं और औद्योगिकरण भी नहीं हुआ। जनसंख्या की सघनता भारत में 10 गुना ज्यादा है अमेरिका से। श्रमिक बहुत बेरोजगार हैं ।किसान भी श्रमिक बनने की दिशा में बढ़ता जा रहा है ।कारपोरेट की ऐसी ही मंशा है। तीनों कृषि कानून इसी दिशा में एक कदम था। खेती का संकट समाज का संकट भी है। बंटे हुए समाज को जोड़कर अपनी ताकत बढ़ाए ।व्यापक एकता से अपनी मदद खुद करनी होगी। कृषि आधारित ग्राम उद्योग की स्थापनाएं।
दूसरा सत्र
जहर मुक्त खेती और उसका सर्टिफिकेशन
डॉक्टर कंबोज सिरसा :बाजार में अनजान आदमी कही गई बात पर विश्वास तब करता है जब सर्टिफिकेशन होता है। शुद्धता का वादा होता है। कृषि के प्राथमिक उत्पादों और मूल्य संवर्धन उत्पादों का सर्टिफिकेशन होना आवश्यक हो गया है । यह व्यक्तिगत और सामूहिक तौर पर करवाया जा सकता है ।बाजार की यही मांग है। एक पीपीटी द्वारा विस्तार से बताया गया।
प्रोफेसर प्रमोद गोरी : ने कहा कि डॉ सुरेंद्र दलाल ने 1990 में पहले समाज साक्षरता शुरू की थी उसके बाद कृषि साक्षरता पर आ पाए ।यह जरूरत आज भी बनी हुई है। आज सबसे पहले नागरिक समाज की साक्षरता करते हुए आगे बढ़ना है। सभी तरह की जानकारियों से लैस किसान और मनरेगा का मजदूर गांव में आत्मनिर्भर बने ,इसके लिए हमें पुस्तकालय और वाचनालय चाहिए। हमारी संस्कृति ऐसी बने कि हम आत्मनिर्भर बनते चले जाएं ।जानकारियों के अभाव में ही किसान और समाज संकट में है। वैज्ञानिक सोच वाला व्यक्ति ही वैकल्पिक रास्ते बना सकता है।
इंजीनियर अशोक कुमार पंजाब: ने मार्केट के अनुभव साझा करते हुए बताया कि हमें किसानों को संगठित करना पड़ेगा। हमने समूह बनाए हैं।कुछ बिक्री केंद्र बनाए और विकसित किए हैं। अपने जैविक कृषि उत्पाद बेचने शुरू किए हैं।साप्ताहिक मंडियां लगाई जा रही हैं। आज चंडीगढ़ तक हमारी पहुंच है । किसान को खुद आगे आना होगा। मूल्य संवर्धन (Value addition) भी करना होगा। गुणवत्ता भी पोष्टिता के हिसाब से बढ़ानी होगी ।मार्केट इस हिसाब से ही पकड़ में आएगी।
धर्म सिंह: कृषि उत्पादों को बेचना इस तरह रखें कि आम आदमी को सुलभ हो। जैविक कृषि उत्पादों को दुगने मूल्यों पर बेचने -खरीदने की रिवायत बन रही है । यह जनसाधारण की खाद्य सुरक्षा को खतरा है। हम हमेशा "सस्ती खेती, टिकाऊ खेती और वैज्ञानिक खेती" की अवधारणा से काम करेंगे तो पंजाब के किसानों की सहकारी बाजार व्यवस्था से सब को संतुलित और सुरक्षित भोजन उपलब्ध करवा सकते हैं । मिट्टी बचेगी, पानी बचेगा, पर्यावरण बचेगा और किसान तथा समाज बचेगा।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता सविता मलिक ,अनीता शर्मा और कुसुम दलाल ने संयुक्त रूप से की ।कुसुम ने कहा कि तीन दशकों से विभिन्न तरह की साक्षरताओं से आज हम मूल समस्या को पहचान पाए हैं। विकल्प पैदा कर रहे हैं। आगे बढ़ रहे हैं ।यह क्रम जारी रहे।
दो प्रस्ताव भी रखे गए:
१. पैस्टीसाइड - हर्बीसाइड का प्रयोग नहीं करेंगे। ड्रोन का इस्तेमाल तो बिल्कुल नहीं करेंगे। सरकार से यह मांग करते हैं ड्रोन स्प्रे पर रोक लगाई जाए ।पर्यावरण के असीमित नुकसान से बचाया जाए।
२. बीटी कपास नहीं लगाएंगे ।सरकार से मांग करते हैं कि हाईब्रीड और देसी कपास का बीज गुणवत्ता सहित उपलब्ध करवाएं।
सभी किसान बहन भाइयों ने प्रस्ताव का समर्थन किया लगभग 129 किसानों ने सुबह 11:00 से सांय 5:00 बजे तक किसान बहन भाइयों ने सक्रियता और तन्मयता से सुना , सहयोग और भागीदारी की । आगंतुकों और वॉलिंटियर्स का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करते हैं।
भविष्य के काम:
१. समय से कीट साक्षरता की क्लासें शुरू करेंगे।संख्या में बढ़ौतरी करेंगे।
२.मृदा स्वास्थ्य और मार्केटिंग पर दो अलग -२ एक दिवसीय कार्यशालाएं आयोजित करेंगे।
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