मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023

प्रेस नोट

 प्रेस नोट

राज्य स्तरीय किसान संवाद एवं विचार गोष्ठी का आयोजन स्थानीय जाट धर्मशाला हिसार में किया गया। सिरसा,फतेहाबाद, हिसार, भिवानी ,जींद ,रोहतक व सोनीपत के 92 पुरुष और 11 महिला किसानों ने भाग लिया।

डा बलजीत सहारण प्रमुख वैज्ञानिक हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार ,डॉक्टर रामनिवास कुंडू ,डॉक्टर राजेंद्र चौधरी ,डॉक्टर राजबीर सांगवान और डॉक्टर सतबीर पूनिया ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ डा. बलजीत सिंह भ्याण के स्वागत भाषण से किया गया। उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल हुए सभी वैज्ञानिकों और किसानों का स्वागत किया और पुरे कार्यक्रम की रूपरेखा रखी।कीट साक्षरता मिशन समूह की किट आचार्य महिलाओं ने कीटों के प्रबंधन पर गीत गाया। इस गीत में कीटों का कीटों से इलाज बताया गया

 इसके बाद 

*मास्टर सुरजीत सिंह बाना, भट्टू ने कुदरती निजाम खेती पद्धति के अनुभव साझा किए ।उन्होंने बताया कि पौधों को पानी की नमी चाहिए पानी नहीं, जमीन से छेड़खानी नहीं करनी चाहिए और जमीन को नंगा नहीं छोड़ना है यानी मल्चिंग करके रखनी है जिससे जमीन पर सूर्य की सीधी किरणें ना पड़े ।समस्या यह है कि इस विधि को अपनाने के लिए औजार उपलब्ध नहीं है एच ए यू हिसार का प्रशासन भी हमारी मदद नहीं करता है। जैविक  किसानों को सब्सिडी देने की मांग भी उन्होंने रखी।

*संजय मेहता कुलेरी ने बताया कि जहर मुक्त खेती के लिए खरपतवार को मल्चिंग के लिए प्रयोग कर सकते हैं इसके अच्छे परिणाम हैं।

 *रणबीर सिंह मलिक कीटाचार्य निडाणा ने कहा कि जहर और रसायन वाली खेती ना केवल खर्च बढ़ाती है बल्कि कृषि उत्पाद और जमीन का स्वास्थ्य भी खराब करती है ।पशु प्रजनन में 90% तक गिरावट आती है तथा मनुष्य को घातक बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

*सुनील कुमार बेनीवाल, मोहब्बतपुर ,आदमपुर ने बताया कि हम 17-18 गांव के लगभग 80 किसानों ने खेत पाठशालाएं लगाई हैं। 150 एकड़ पर जैविक कृषि खेती शुरू की है। हमारी विधि से 70% पानी की बचत होती है।

*मनवीर रेड्डू कीट- आचार्य इगरा ने रहस्योद्घाटन किया कि किसान कृषि के मूल सिद्धांतों को समझें । कंपनियों या किसी भी समूह के बताए फार्मूले से खेती करेंगे तो फसेंगे ही। अभी तक गोबर की खाद पर ही जोर दिया जा रहा है जबकि मूत्र कहीं ज्यादा पोषक तत्व उपलब्ध करवा सकता है क्योंकि पौधों को नाइट्रोजन उपलब्ध करवाने वाले सूक्ष्म जीवों का मूत्र ,तैयार भोजन है।

*भानी राम काशी का बास सिरसा ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रू12000 /- का पेस्टिसाइड खर्च किया और सफेद मक्खी का प्रकोप रूकने की बजाय बढ़ा। दोहरी मार किसान पर पड़ी। रसायन रहित कुदरती खेती से 2 गुना लाभ हो सकता है।

*सविता मलिक ललित खेड़ा जींद ने अनुभव साझा करते हुए रेखांकित किया कि प्रकृति में संतुलन बनाने की समझ से खेती करते हैं तो बहुआयामी लाभ होता है। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन ,स्वास्थ्य लाभ और पर्यावरण संतुलन में मदद करते हैं।

*जयपाल पूनिया ब्याना खेड़ा ,बरवाला ने खेती के आधारभूत जरूरी घटक बीजों पर चर्चा की। स्थानीय देशी बीजों को संरक्षण और बीज बैंक की स्थापना की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने बेंगलुरु की पांच दिवसीय कार्यशाला के अनुभव भी साझा किए। बीजों की शुद्धता और संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की।

*एक अन्य किसान सज्जन सिंह, नोहर (राजस्थान )ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर हम सब का समान अधिकार है ।इसको बचाने की जिम्मेदारी भी सामूहिक है ।कारपोरेट खेती ने हमें बर्बाद किया है। इसका विकल्प ही आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

* युवा किसान मैनपाल, काजला, हिसार ने सी वी आर विधि से खेती के अनुभव का जिक्र किया। इसमें मिट्टी के गोल से स्प्रे करके कीटों का प्रबंधन और पोषक तत्व को प्राप्त किया जा सकता है। इस विधि से प्राप्त फल स्वादिष्ट पाए गए हैं।

*नीरज नरवाना ने बाजार रणनीति पर अपने अनुभव साझा किए । किसानों के समूह बनाकर सूचनाओं का आदान-प्रदान करके हम मिडिल मैन के शोषण से बच सकते हैैं।

टिप्पणी कारों में बलजीत सहारण ने जैव विविधता पर केंद्रित बातचीत रखी ।सूक्ष्मजीवों के क्रियाकलापों को समझना और संरक्षित करना हमारा मुख्य काम होना चाहिए ।यह उत्पादन की लागत घटाने में सहायक है और पोषक तत्वों को बढ़ाने में मदद करते हैं।

रामनिवास कुंडू मृदा स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने उत्पादन विधियों से सहमति जताई । साथ ही नीतियों की बात को विशेष रूप से रेखांकित किया। खासकर हरित क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पैदा तो बढ़ी।अनाज में हम तन निर्भर भी हुए लेकिन किसान की माली हालत बिगड़ती ही जा रही है, यह सोचने का विषय है। किसान और कारपोरेट के अंत:संबंधों और संघर्षों को समझकर ही विकल्प पैदा कर सकते हैं।

राजेंद्र चौधरी संयोजक कुदरती खेती हरियाणा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसानों को खुद कास्तकार बनने और प्रशिक्षण की जरूरत है ।आश्वासन और प्रचार के भरोसे ना रहकर तुलनात्मक अनुभव प्राप्त करें। फसल की वैरायटी और वातावरण प्रमुख घटक हैं जो किसान की आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि नीतियों को स्पष्ट करें। एक तरफ राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 2022 लांच किया है दूसरी तरफ जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहले कपास, बैंगन और टमाटर और अब सरसों के  जैनिटिकली मोडीफाई बीज की अनुमति देना भ्रम पैदा करता है।

संचालन करता धर्म सिंह संयोजक कृषि समूह ने अपील करते हुए कहा कि नीतियों और विधियों को जाने, समझे और प्रयोग करें। हमारा संयुक्त प्रयास जिसमें कीट साक्षरता मिशन हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति और कपास उत्पादक समूह शामिल हैं, का कहना है कि 'सस्ती खेती, टिकाऊ खेती और वैज्ञानिक खेती' की अवधारणा से तकनीक विकसित करें। हमारा मानना है कि किसान आत्मनिर्भर बने, उपभोक्ता का स्वास्थ्य सुधरे तथा नए रोजगार सृजित हो। ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों से पार पा सकें। धरती पर पारिस्थितिकी तंत्र बचा रहे। 

कार्यक्रम के आखिरी में डा. बलजीत सिंह भ्याण ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया और इस जहर रहित और आत्मनिर्भर खेती को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा की प्रकृति के अनुरूप इकोलोजीकल और टिकाऊ खेती ही सही विकल्प है।हमें आपस में सिखना और सिखाना है लेकिन अपने ज्ञान को बेचना नहीं है। विज्ञान का प्रयोग समाज की भलाई के लिए होना चाहिए न की कार्पोरेट के मुनाफे के लिए।

इस अवसर पर सर्वेक्षण प्रपत्र के माध्यम से लिखित आंकड़े भी जुटाए गए। कृषि अर्थशास्त्री इनका विश्लेषण करके भावी कार्ययोजना प्रस्तुत करेंगे। किसानों के वार्षिक समागम में यह आह्वान किया कि अगले वर्ष मृदा स्वास्थ्य पर फोकस किया जाएगा। खेत पाठशालाएं बढ़ाई जाएंगी। नेटवर्किंग के माध्यम से वैकल्पिक विधियों का दायरा भी और ज्यादा बढ़ाया जाएगा।

आयोजक:डा सुरेन्द्र दलाल कीट साक्षरता मिशन, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति व कपास उत्पादक समूह (AIKS)

                                                  जारी कर्ता

             धर्मसिंह, राज्य संयोजक क़ृषि समूह हरियाणा।

  Mobile no          8901210444

 E-mail address:            dharamsingh141963@gmail.com

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें