मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023

कृषि क्षेत्र संक्षिप्त रिपोर्ट।

 कृषि क्षेत्र संक्षिप्त रिपोर्ट।

हिसार जिला सम्मेलन जून 2018 व राज्य सम्मेलन भिवानी फरवरी 2020 के बाद कृषि क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण काम जिनकी रिपोर्ट इस प्रकार है:-

हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के परिप्रेक्ष्य की संगति में पहला और मूल कार्य इस क्षेत्र का भी वैचारिक स्तर का किया गया है। तीन नए कृषि कानूनों पर आए ड्राफ्ट को समझने के लिए वर्ष 2021 में  हिसार में राज्य स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न जिलों के सभी सदस्य शामिल हुए। खेती-बाड़ी ,खाद्य सुरक्षा और रोजगार को समाप्त करने की मनसा को उजागर किया गया । जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्या को इसके साथ जोड़कर बताया गया ।अति केंद्रीकरण की प्रक्रिया से अवगत करवाया गया ।कृषि और पशुधन के उत्पादों को माल के रूप में कैसे बदला जा रहा है और निजी मुनाफे की व्यवस्था की जा रही है,इस पर विमर्श किया गया इन तीन नए कृषि कानूनों के ड्राफ्ट में।

इसी का विस्तार किसान आंदोलन से जोड़कर हिसार में जिला सत्र का आयोजन कंवारी में अलग से आयोजित किया ।इसमें लगभग 60 लोगों ने भागीदारी की। वैचारिक विमर्श को आगे बढ़ाया गया ।बरवाला खंड की एक दिवसीय कार्यशाला अलग से की गई। विज्ञान आंदोलन और कृषि क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।

बहबलपुर और चिकनवास टोल पर आन्दोलित किसानों के धरने को  संबोधित किया गया।

वर्ष 2022 व 23 में निरंतर रूप से किसान संवाद एवं विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है । इन आयोजनों में सिरसा ,फतेहाबाद, हिसार ,भिवानी, जींद ,रोहतक व पानीपत के साथी शामिल होते रहे  । इनमें हाजरी 100 से लेकर 125 तक रही है।

जिला हिसार में ऑनलाइन क्लासेज निरंतर जारी है । व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संवाद प्रतिदिन हो रहा है। इसमें कुछ साथी पंजाब और राजस्थान के भी जुड़े हुए हैं। डॉ सुरेंद्र दलाल की पाठशाला ओं का आयोजन निरंतर है । इनका दायरा भी बढ़ाया गया है। इस साल गांव मोहब्बतपुर में नई क्लास शुरू की है ।इस क्लास में 8-10 गांव के 70-80 किसान भाग ले रहे हैं। इस प्रक्रिया में स्रोत व्यक्ति  कीट- आचार्य और वैज्ञानिकों का एक छोटा समूह विकसित हुआ है । संगठन के भीतर भी समझ बढी है।  नए लोगों की आमदन भी हुई है । खासकर युवा किसानों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

इस दौरान मृदा स्वास्थ्य पर बहुत विस्तार से डॉ रामनिवास कुंडू ने साल भर कलासें ली हैं। एक पुस्तक का मसौदा भी तैयार कर लिया है ‌।आम आदमी की जरूरत और समझने के लिए व

लिहाज से प्रकाशन हेतु तैयार है।

कृषि उत्पादों के मूल्य वर्धन पर बात की है। वर्तमान  बाजार की चर्चा बीच में लाई गई है। पशुधन और खेती के अंत: संबंधों को जोड़ना जरूरी  समझा गया  है । कारपोरेट खेती और किसानों के संघर्ष को रेखांकित किया गया है । 'भारतीय प्राकृतिक कृषि मिशन" जो अगस्त 2022 में स्थापित किया गया तथा वर्ष 2023 -24 के बजट में लागू करने का प्रावधान किया गया है, इसको भी समझने की प्रक्रिया शुरू की है । मोटे तौर पर यह हरित क्रांति के माध्यम से कारपोरेट खेती और अब भ्रमित करके जैविक खेती को भी कारपोरेट खेती के लिए ही प्रोत्साहन दिया  है। किसान ,मजदूर और उपभोक्ता के हितों पर ही कुठाराघात  किया गया है।

हरियाणा राज्य और हिसार जिला में कृषि कोर गठित किए गए हैं ।संगठन की क्षमता अनुसार अपना काम विज्ञान आंदोलन की संगति में आगे बढ़ा रहे हैं। बैठकें जरूरत के अनुसार नियमित हैं। अपने आयोजन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से कर रहे हैं। आर्थिक तौर पर भी आत्मनिर्भर हैं।

राष्ट्रीय सत्र की गतिविधियों में निरंतर भागीदारी है ।हरियाणा प्रदेश और हिसार की धरातल की रिपोर्टिंग साझा की जा रही है इस प्रक्रिया से कृषि क्षेत्र में हस्तक्षेप की समझ बनी है।

संभावनाएं :- समझ और संगठन विस्तार की संभावनाएं बन रही है। कुछ जिलों में खेत पाठशाला के किसानों का जिला स्तरीय संगठन बनाया जा सकता है, जो वैज्ञानिक दृष्टि से लैस होकर वैचारिक और सांगठनिक क्षमता हासिल करेगा। इसमें सिरसा, फतेहाबाद ,हिसार ,जींद और पानीपत है सकते हैं।

निष्कर्ष:-  सस्ती खेती, टिकाऊ खेती और वैज्ञानिक खेती की अवधारणा को फलीभूत करने के लिए agro ecosystem services (पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं  )को समझना और लागू करना मुख्य काम और विकल्प बन रहा है। सहकारी कार्य प्रणाली , बाजार आधारित व्यवस्था को बदल सकती है । इससे पहले किसान सभा ,कीट साक्षरता मिशन और कुदरती खेती मिशन से जुड़े किसानों के सहयोग से सर्वेक्षण किया जा रहा है।इन सभी क्रियाकलापों से भावी योजना बन रही है ।

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