बुधवार, 15 जनवरी 2020

कलमा सुत्त

बार बार सुनी बात पर भरोसा न करें |  न परम्परा पर, न अफवाह पर, न धर्म ग्रन्थ में लिखी किसी बात पर , न अंदाजे पर , न किसी कहावत पर , न निरर्थक तर्क पर, न सोचे गए विचार के प्रति पूर्वग्रह पर, न किसी की आभासी योग्यता पर , विचार पर , " मठवासी हमारा शिक्षक है " | ' कलमाओं , आप स्वयं जानते हैं :' ये साड़ी चीजें बुरी हैं ; ये चीजें निंदनीय हैं ; बुद्धिमानों ने  इन चीजों की निंदा की है ; इन चीजों को करने और देखने से नुक्सान और बुराई होती है ', इनका त्याग करो....|'
    ये बुद्ध के शब्द हैं जो उन्होंने केसपुत्त के कलमाओं  से कहे जिन्होंने बहुत से मठवासियों और ब्राह्मणों की भरम पैदा करने वाली शिक्षाओं के मद्देनजर उनसे मार्ग दर्शन करने के लिए कहा था |  उन्होंने पूछा था :' वे केवल  अपने सिद्धांतों का ही प्रतिपादन और व्याख्या करते हैं ; दूसरे के सिद्धांतों से घृणा करते हैं , उनकी निंदा करते हैं और ध्वस्त क्र देते हैं | आदरणीय उनके बारे में हमारे मन में संदेह है , अनिश्चितता है |'
(कलमा सुत्त ---- कलमों को शिक्षा , सुत्त सं. 65 )

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