बुधवार, 18 अप्रैल 2012

कन्धा मेहनतकश का बन्दूक उनकी 
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किसी  के दीवालों का बोझ  किसी को 
सौगात के रूप में दिया जा रहा यारो 
मजदूर और मेहनतकश जनता को 
बलि का बकरा बनाया जा रहा देखो 
देशों की सरकारों पर ये काम खर्ची 
पैकेज थोंपे जा रहे हैं धींगामस्ती से 
ये कम खर्ची उनको पहुँच रहे है जो 
पहले ही कम खर्ची के शिकार हुए हैं 
उन पर बेइंतिहा कटौतियां हैं  लादी  
संकट से उबरने का यह "राम बाण" 
दवा और गहरे संकट के बीज बो रही 
झाड़ियाँ उग आई हैं हमारे आस पास 
बेरोजगारी तेजी से बढ़ती जा  रही है 
जनता की खरीद  की ताकत घट रही 
घिया सत्तर रुपये किलो बिक रही यारो 
मंदी का दौर भयानक रूप धार रहा है 
सुसाइड झगडे हिंसा ये सब बढ़ा रहा है 
सर काट कम्पीटीसन मैनीपुलेसन आज 
शोषण के नए हथियार उभर कर आये 
सोचो सोचो सोचने पर प्रतिबंध लगाये 
टी वी इंटर नेट पे पोर्नोग्राफी के ये जाल 
हमारे चारों और बतौर साजिश फैलाये 
नया कंसेप्ट ब्यूटी कम्पीटीसन का लाये 
हमारे दिमाग को अधरंग की हालत में 
कंडीसंड करके तैयार कर लिया कि जो 
वो चाहें जिस तरह वो चाहें हम वही उसी 
तरह सोचें और उनके गुणगान करेँ जो 
असल में हमारी तबाही के गुनहगार हैं |

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