शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

शिक्षा

1 . 2011 के जनगणना आंकड़ों के मुताखबक 27% लोग अशिक्षित हैं, जो कि हमारी जनसंख्या के 30 करोड से अधिक को शामिल करता है।
महिलाओं में साक्षरता की दर मात्र 65% है जिसका अर्थ है कि 35% महिलाएं अभी भी अशिक्षित हैं। दलितों , आदिवासियों , तटीय इलाक़ों के मछुआऱों और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय से संबंधित लोग़ों में साक्षरता की दर काफी कम है। वर्तमान स्थिति को कैसे सही ठहरा सकते हैं, खासतौर पर तब जबकि आजादी के 71 साल़ों के बाद भी हमारे देि में 30 करोड से अधिक अशिक्षित भाई-बहन मौजूद हैं।

2 . UNESCO (यूनेस्को) द्वारा दुनिया भर में जारी की गई द एजुकेिन फॉर ऑल ग्लोबल मॉनिटरिंग रिपोर्ट 2013-2014 (GMR) में भी स्वीकार किया गया है कि अभी तक भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा 287 मिलियन (28 करोड 70 लाख) अशिक्षित लोग़ों की जनसंख्या है, जो कि वैश्विक योग का 37 प्रतिशत है। यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से इस तथ्य को रेखांकित करती है कि सर्वाधिक हासिये पर रहने वाले समूह़ों के लोग़ों को दशकों से शिक्षा के अवसऱों से वंचित रखा जाना जारी है। रिपोर्ट आगे कहती है कि धनी युवा महिलाओं ने पहले ही वैश्विक साक्षरता का स्तर हासिल कर लिया है लेककन गरीब महिलाओं के लिए ये सन 2080 के आसपास संभव हो पाने का अनुमान है, यह बात ध्यान देने योग्य है कि भारत के भीतर यह विशाल असमानता सर्वाधिक जरूरतमंद लोग़ों की ओर पर्याप्त रूप से समर्थन दे पाने में विफलता की ओर इशारा कर रही है।
3. भारतीय शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे बडी शिक्षा प्रणालियों में से एक है, इसमें 2014-15 के लिए UDISE के आंकड़ों के मुताबिक कक्षा 1 से 12 तक लगभग 260 मिलियन (26 करोड) बच्चे पढ़ रहे हैं, यह 36 राज्य़ों और कें शाषित प्रदेशों में स्थित है, 683 जिल़ों में 15 लाख से ज्यादा स्कूल शामिल हैं; लगभग 75% प्राथमिक, 43% सेकेंडरी और 40% हायर सेकेंडरी स्कूल़ों का स्वामित्व और प्रबंधन सरकार करती है, बाकी के निजी क्षेत्र में हैं, जिनका स्वामित्व और प्रबंधन
निजी एजेंसियां करती हैं। 2014-15 के U-DISE आंकड़ों के मुताबिक स्कूल़ों में दाखला लेने वाले 260 मिलियन बच्च़ों में, प्राथमिक शिक्षा 192 मिलियन (19 करोड 20 लाख) बच्च़ों को शामिल करती है, सेकेंडरी शिक्षा में 38 मिलियन (3 करोड 80 लाख) बच्चे हैं और हायर सेकेंडरी शिक्षा में 24 मिलियन (2 करोड 40 लाख) बच्चे शामिल हैं। इन आंकड़ों में उच्चतर शिक्षा में दाखला लेने वाले बच्चे शामिल नहीं हैं जिसमें 30 मिलियन (3 करोड) से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं। जन खिक्षा ही एकमात्र प्रणाली है जिसका देश के अधिकांश परिवारों से सीधा संपर्क है।

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