क्या हो रहा है इसकी चिंता हमें नहीं है
जब तक वह हमारे घर में नहीं हो रहा
हमारे घर में होते ही दुनिया याद आती है
कोसते हैं दुनिया क़ी निष्क्रियता को तब
चाहते है क़ि भगत सिंह तो फिर पैदा हो
मगर पडौसियों के घर हो पैदा हमारे नहीं
बेटे को तो ट्यूशन से फुर्सत नहीं मिलती
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