आज कल हरयाणा में एक नयी परंपरा उभर रही है जो पहले बहुत ही बुरी बात मानी जाती थी । लडकी को अपने पीहर की धन धरती में हिस्सा उसे नहीं दिया जाता था । वह अपने नाम की धरती भाईयों के नाम करवा देती थीं । पिछले दिनों बरोना कड़ोहली पह्लादपुर के पास से नेशनल हाई वे का निर्माण हुआ तो कई किसानों की जमीं एक्वायर हुयी । उसमें धर्मा के परिवार की दो एकड़ जमीन भी आ गयी । धर्मा के दो बेटे हैं और एक बेटी है । बेटी लिछमी नरेला में ब्याही है । उसका पति डी टी सी में ड्राइवर है । साथ लाख रूपये मिले हैं जमीं के । धर्मा तीस तीस लाख दोनों बेटों को देने का मन बनाता है । उधर लिछमी के ससुर को पता चलता है तो बहुत बेचैन हो जाता है । पहले पंचायत में वह महिला के पीहर में धरती के अन्दर अधिकार का विरोध कर चुकाहै । मगर अब बीस लाख रुपये का मामला है । करे तो क्या करे ? दुविधा में है कई दिन से । एक दिन वह सोचता है कि धरती का बंटवारा थोड़े ही करवा रहे हैं । यह तो बिकी हुयी जमीं का मामला है । इसमें तो लडकी को हक़ मिलना ही चाहिए । घर में जिकर करता है अपनी पत्नी से । सुनकर वह भी बेचैन हो जाती है । पर बीस लाख उसकी बेचैनी को ज्यादा देर नहीं टिकने देते । सास भी लिछमी को समझाने की कोशिश करती है बीस लाख के बारे में । लिछमी भी सुनकर बेचैन हो जाती है । दो दिन तक उसे ठीक से नींद भी नहीं आती । आखिर अपने पति को बताती है ।लिछमी अपनी सहेली के सामने दिल का हाल कुछ इस तरह से बयाँ करती है :-
एक और नै कुआँ दीखै दूजे औड नै चोडी खाई बेबे ।।
नेशनल हाई वे बणग्या म्हारी बी धरती आयी बेबे ।।
कड़ोहली पह्लादपुर गाम मेरा दो किल्ले आगे म्हारे
साठ लाख का मुआवजा दो भाईयाँ के दिन संवारे
तीस लाख एक तै देवन की बाबू सलाह बनाई बेबे।।
मेरी ससुराल मैं बेरा लाग्या सुर सुर होण लगी
सास मेरी भी कई तरियां मेरे मन नै टोहण लगी
सहज सी मेरे ससुर नै हिस्से की बात चलायी बेबे ।।
पंचायत मैं सुसरे नै पीहर हिस्सा नाट दिया सखी
अपना थुक्या खुद बेबे हिस्सा मांग चाट लिया सखी
सुनकै हिस्सा ल्याण की बात मैं एकबै घबराई बेबे ।।
उसकै आगै मने रात नै शंका दिल की खोल दई थी
पीहर मैं मां बाप भाई कहैं माड़ी बात बोल दई थी
रणबीर पति चुप रहग्या नहीं आँख मिलाई बेबे ।।
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