शनिवार, 18 नवंबर 2023

Rajender Singh 1

 [05/11, 8:28 am] Rajender Singh Karnal: केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल में 25 अक्टूबर 2023 को धान के फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित सभी  स्टेक होल्डर किसान फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग संयंत्र निर्माता उद्योगपति  के साथ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत अनुसंधान संस्थानों हरियाणा पंजाब स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति गुरु अंगद देव वेटरनरी विश्वविद्यालय   लुधियाना के कुलपति भारत सरकार के कृषि सचिव के साथ  ऑनलाइन एशिया ट्रॉपिकल खेती संस्थान हैदराबाद से डॉक्टर एम  ल जाट सहित सभी ने पराली जलाने को नियंत्रित करने के लिए गहन मंथन किया उपरोक्त मंथन में डॉक्टर एम ल  जाट के वक्तव्य फसल अवशेष प्रबंधन में सफलता न मिलने के कारण का आत्म विश्लेषण  करके आगे बढ़ने का संदेश दिया गया था हरियाणा विज्ञान मंच का विचार है की फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या हमारी खेती के अंदर विविधता किसानों की जोत के आकार  ग्रामीण लोगों का खेती के ऊपर निर्भरता इत्यादि से जुड़ी हुई है जबकि मौजूदा सरकारों की ओर से वास्तविक स्थिति को नजर  अंदाज करके ऐसे तरीकों को प्रोत्साहित किया जाता है जिन में उद्योगपतियों व व्यापारियों को लाभ हो ऐसी तकनीक जैसी प्राकृतिक खेती में स्थानीय स्तर के संसाधनों के 100% इस्तेमाल पर आधारित है उसमें बाजार से कुछ नहीं खरीदना पड़ता  हमारा देश पशुओं की संख्या में भी विश्व में पहले स्थान पर है यह भी सच्चाई है की पशुओं के लिए चारे की निरंतर कमी होती जा रही है गांव की 60% आबादी का पशु आजीविका का साधन है हमारे ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा है इसका मुख्य कारण है खेती में रोजगार का लगातार कम होते जाना  हरियाणा  विज्ञान मंच ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया है की पशु चारे के लिए  धान की कंबाइन से  कटाई के बाद फसल अवशेषों को गरीब लोगों को चारे की जगह इस्तेमाल करने के लिए कृषि किसान कल्याण विभाग हरियाणा द्वारा निर्धारित ₹1000 प्रति एकड़ दे दिया जाए यदि इसे मनरेगा से जोड़ा जाए इसमें 100% कामयाबी मिलेगी इस इसके अलावा त धान के अवशेषों से कमपोस्ट खाद  स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार  करवाया जाना चाहिए इससे प्रदेश में 1 लाख से अधिक अधिक महिलाओं को रोजगार मिलेगा केंद्र सरकार द्वारा प्रगति मैदान में नई दिल्ली में विश्व खाद्य प्रदर्शनी में हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 50000 करोड़ विदेशी पूंजी खाद्य प्रसंस्करण में आने की जानकारी दी जबकि उन्होंने स्वयं सहायता समूह को  खाद्य प्रसंस्करण में बढ़ावा देने की भी जानकारी दी  फसल अवशेष प्रबंधन व खाद्य प्रसंस्करण दोनों स्थितियों का हमारे देश में सरकारों की नीतियों से सीधा रिश्ता है हमारे देश में ऐसी नीति की जरूरत है जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होता हो लोगों को काम  मिलता हो जबकि पूर्व व मौजूदा  सरकार विदेशी कंपनियां व देश के बड़े उद्योगपतियों के हितों की परोपकारी के लिए नीतियां बनती है जिन में रोजगार की बजाय मशीन काम करती है जिनकी वजह से समस्याओं का समाधान नहीं होता  है  हरियाणा सरकार द्वारा  2 नवंबर को अंत्योदय दिवस मनाया गया   अंत्योदय सम्मेलन में 80% भागीदारी स्वयं सहायता समूह से संबंधित महिलाओं की थी लेकिन वे  सबसे ज्यादा निराश हुई है क्योंकि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं में जागरूकता आने की वजह से वे रोजगार के लिए सबसे ज्यादा  मुखर  है  वे कहती है  कि हमारे से हुनर के माध्यम से कोई सामान सरकार बनवा ले लेकिन बिक्री का प्रबंध भी सरकार करें लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही उसका बड़ा कारण उच्चतम न्यायालय द्वारा चुनाव के लिए इलेक्टोरेट्स बॉन्ड की सुनाई में  छिपा हुआ है जिन कंपनियों  व उद्योगपतियों से चुनाव के लिए फंड लिया जाएगा नीतियां भी उन्हीं के अनुकूल बनाई जाएगी इसीलिए हमारी समस्याएं सालों दर साल लटकी रहती है डॉ राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य हरियाणा विज्ञान मंच

[06/11, 9:53 am] Rajender Singh Karnal: हरियाणा पंजाब में सबसे पुराने व प्रतिष्ठित अखबार दैनिक ट्रिब्यून में देश की गरीब आबादी के लिए मुफ्त राशन को लेकर संपादकीय छपा है हम इस समय एक ऐसे चौराहे पर खड़े हैं जहां देश की जनता को ऐसे  सबझबाग  दिखाई जा रहे हैं जो वास्तविकता से कोसों दूर है हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के वर्ष को अमृत कॉल वर्ष का नाम देते हुए उसका  नई दिल्ली में स्मारक बनाया है उसके उद्घाटन के समय प्रधानमंत्री जी ने आजादी के 100 साल पूरे होने पर वर्ष 2047 में देश को विकसित राष्ट्र बनने का दावा किया लेकिन यह नहीं बताया कि  देश की कितनी आबादी विकसित होगी हमारे देश का कौन सा नागरिक यह चाहेगा कि हमारा देश विकसित राष्ट्र ना बने लेकिन केवल  चाहाने व इच्छा पालने से सब कुछ अपने आप नहीं हो जाता देश के विकसित राष्ट्र बनने  में सैकड़ो चीज जुड़ी हुई है हमारे देश के महान आध्यात्मिक दार्शनिक स्वामी विवेकानंद ने 1896 में शिकागो में महिलाओं के समाज व विकास में योगदान पर  वक्तव्य देते हुए बताया था कि  वह देश कितना विकसित है उसे देश में रहने वाली महिलाओं के साथ व्यवहार एक बैरोमीटर है महिलाओं को बराबरी का स्थान दिए बिना कोई देश कभी भी विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता यह विश्व का इतिहास कहता है लेकिन देश की  आजादी के   75 साल  बाद भी हमारे देश में महिलाओं की स्थिति सब के सामने है मैं इस विषय पर गहराई में जाने की बजाय मूल विषय पर  ध्यान केंद्रित करूंगा की अब भी बहुत विशेषज्ञ अर्थशास्त्री यह दावा करते हैं कि हमारा देश बड़ी तेजी से विकास कर रहा है वह दिन जल्दी आने वाला है जब हमारा देश विकसित राष्ट्र बनेगा वे  इस बात को नजरअंदाज करते हैं की जितनी असमानता हमारे देश में है विश्व में किसी देश में नहीं है जिस देश की 80% आबादी मुफ्त के अनाज पर निर्भर है कि वे अपनी मेहनत से अपने परिवार के लिए भोजन जूटआने  में असमर्थ है यह  स्थिति भी संभव है  कि वह बेरोजगार हो  अथवा  उसका शरीर कार्य लाइक न हो इसका एक निष्कर्ष यह भी निकलता है कि देश की पूर्व व वर्तमान सरकार ने केवल  20% जनता का ही उद्धार किया है बाकी की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया  हैं उनके विकास को ही 80% जनता को काल्पनिक सपना  दिखाकर विकास मान लिया जाता है हमारे देश के हरित क्रांति के  प्रभाव में अग्रणी राज्य हरियाणा की आज यह स्थिति है कि गांव में 70 प्रतिशत महिलाएं केवल काम देने की बात करती है वह यह कहती है की गुजरा बिल्कुल नहीं हो रहा हमें कोई करने के लिए काम दिया जाए हरियाणा विज्ञान मंच का मानना है कि जब किसी को अपने कार्य से न्यूनतम ₹20000 तक आमदनी मिल जाती है वह कटोरा  हाथ में लेकर मांगने की चेष्टा नहीं करता हरियाणा विज्ञान मंच सबसे ज्यादा भूमिहीन परिवारों की महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध कराने की मांग करता है की 80%  आमदनी के कार्य जमीन पर ही होने हैं लेकिन हरियाणा सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ ने बामनिया स्वयं सहायता समूह को बाजरे के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देने के साथ बिक्री में भी मदद की जिसकी बदौलत उन्हें जापान सरकार से 2 करोड रुपए के बाजरे के लड्डू बनाने का आर्डर मिला है इस समूह से जुड़ी हुई महिलाओं को सस्ते अनाज की आवश्यकता अब नहीं रहेगी क्योंकि वह खुद कमाने लग गई है  उन्हें अपने समूह से ही आजीविका लायक आमदनी हो रही है  हमारे देश की राजनीति में वेलफेयरीज्म का कॉन्सेप्ट पहले इतने व्यापक रूप में कभी- सामने नहीं आया था    मंदिर के सामने बड़ी संख्या में भिखारी आने वाले पुजारी की इंतजार में खड़े होते हैं  वे उन्हें देखकर हैं  कटोरे को आगे करके खाने के लिए कुछ मांगते हैं  इसी तरह राजनीतिक पार्टियों गरीब लोगों के वोट लेने के लिए बेरोजगारी की मार का सामना कर कर रहे लोगों को मुफ्त की चीज देने का वादा करती करती है इससे कैसा  समाज निर्माण होगा उसकी भी हमें कल्पना और चिंतन करना चाहिए  धन्यवाद डॉ राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य हरियाणा विज्ञान मंच

Rajender Singh karnal

 [07/11, 8:00 am] Rajender Singh Karnal: हमारे देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट  एक बहुत बड़ी समस्या है यदि  सहकारी क्षेत्र की प्राइवेट  क्षेत्र के साथ तुलना की जाए हमें अंतर स्पष्ट नजर आएगा  हमारे सामने सहकारी क्षेत्र के गुजरात के  अमूल के डेरी उत्पाद व कृषि कृषि क्षेत्र के  रासायनिक  खाद कीटनाशक दवाइयां व बायोफर्टिलाइजर में इफको के उत्पाद का प्राइवेट क्षेत्र के उत्पाद के साथ गुणवत्ता के क्षेत्र में मुकाबला किया जाए आपको इन दोनों क्षेत्र अमूल डेयरी उत्पाद व इफको के उत्पाद  की गुणवत्ता की शिकायत  कभी अखबारों में पढ़ने को नहीं मिली होगी यह एक शोध का विषय है की सहकारी क्षेत्र पर प्राइवेट क्षेत्र क्यों भारी पड़ रहा है जबकि जनता भी सहकारी क्षेत्र  के उत्पाद को सबसे ज्यादा पसंद करती है हरियाणा विज्ञान मंच ने अनुभव किया है की स्वयं सहायता समूह से संबंधित महिलाएं प्रशिक्षण लेकर अपने हाथों से तैयार उत्पाद की बिक्री अपने घर  से ही एक दुकान खोलकर करती हैं  जबकि शहरों में अच्छे गुणवत्ता युक्त उत्पाद की बहुत ज्यादा मांग है जिला करनाल की अतिरिक्त उपायुक्त डॉक्टर  वैशाली शर्मा द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल में हल्दी का प्रशिक्षण ले रही महिलाओं को शहर में मार्केटिंग हब बनाने का सुझाव सबसे ज्यादा प्रासंगिक है हरियाणा विज्ञान मंच इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रहा है की प्राकृतिक विधि से तैयार उत्पाद को एक फूड चेन के  माध्यम से पारदर्शिता व निरंतर गुणवत्ता की जांच के साथ कैसे मार्केटिंग की जाए  करनाल में सब्जी डेयरी उत्पाद व मिलेट्स के उत्पाद का हब बनाया जाना चाहिए क्योंकि  स्वयं सहायता समूह से संबंधित महिलाओं के प्रशिक्षण के उपरांत अपने घर पर तैयार उत्पाद की मार्केटिंग की मार्केटिंग सबसे बड़ी समस्या है  इसका अभी तक कोई ठोस हल भी  सामने नहीं आया है  यह मॉडल केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार के सक्रिय सहयोग से ही सफल हो सकता है जिससे मिलावटी खाद्य पदार्थों से जनता को राहत मिल सकती है हमारा आम लोगों से भी अनुरोध है कि वे गुजरात के लोगों की तरह विदेशी उत्पाद के स्थान पर अपने पड़ोसियों के बने उत्पादों को खरीदने में प्राथमिकता दें डॉ राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य हरियाणा विज्ञान मंच

[07/11, 8:38 pm] Baljit Bhayan: *सस्ती खेती*  , *टिकाऊ खेती* , *वैज्ञानिक खेती*

 किसान साथियों

डा. सुरेन्द्र दलाल कीट साक्षरता मिशन और हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा  आन लाइन क्लास आयोजित की जा रही है।अगली क्लास

 दिनांक 08-11-2022  बुधवार को सांय 8 बजे से 9 बजे  तक होगी।

*विषय*:-  गेहूं की खेती 

*मुख्य वक्ता*:डा. विक्रम सिंह

 वरिष्ठ गेहूं वैज्ञानिक

CCSHAU Hisar 

आप नीचे दिए गए गुगल मीट के लींक पर क्लीक करके क्लास से जुड़ सकते हैं।

यदि क्लास से जुड़ने में कोई समस्या आऐ तो आप फोन नंबर 9813444282 पर कॉल करके बात कर सकते हैं।

सादर

डा. बलजीत भ्याण         डा. धर्म सिंह

संयोजक                       सहसंयोजक

डा. सुरेन्द्र दलाल किसान खेत पाठशाला

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[08/11, 7:36 am] Rajender Singh Karnal: तेलंगाना राज्य  हैदराबाद में स्थित सस्टेनेबल कृषि विकास प्रतिष्ठान खेती के मौजूदा स्वरूप को बदलकर ऐसे मॉडल पर पिछले 25 सालों से कार्य कर रहा है जिसमें स्थानीय संसाधनों जैसे  फसल अवशेष हरी खाद मल्चिंग फार्म यार्ड कंपोस्ट के साथ मिश्रित खेती के मॉडल पर कार्य कर रहा है जिसके अच्छे परिणाम आने की वजह से आंध्र प्रदेश व  तेलंगाना में चार लाख किसान उपरोक्त मॉडल को अपना चुके हैं दोनों राज्यों में रासायनिक खाद व कीट नाशक दवाइयां का प्रयोग लगातार तेजी से घटता जा रहा है जिससे किसानों की आमदनी में  निरंतर वृद्धि हो रही है किसानों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं उल्लेखनीय गिरावट आई है इस मॉडल में  रोजगार प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जहर मुक्त खाद्य पदार्थ व सहकारिता खेती को प्रमुख स्थान दिया गया है  हरियाणा विज्ञान मंच  वर्ष 2013 से इस मॉडल पर जिला करनाल व पानीपत में किसान पाठशाला का आयोजन  करता आ रहा है  अब तक पचासी किसान पाठशालाएं आयोजित की जा चुकी है उसमें प्राकृतिक विधि से फसल अवशेष मल्चिंग से न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग के लिए ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है जिसमें महिलाएं बढ़-चढ़कर रुचि ले रही है गांव रशीन में महिलाओं ने बताया कि  हमारे गांव  में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन करनाल से संबंधित समूह की महिलाओं के द्वारा हरियाणा विज्ञान मंच के सहयोग से मूंग की खेती सहकारिता करने का मॉडल सफल रहा है हम  इसी प्रयोग को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जहर मुक्त सब्जी के लिए लागू करना चाहती है प्रशिक्षण के दौरान 15 महिलाओं ने सहकारिता से सब्जी की खेती करने का आवेदन किया है धन्यवाद डॉ राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य हरियाणा विज्ञान मंच

[11/11, 11:34 am] Rajender Singh Karnal: हरियाणा विज्ञान मंच न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग को लागू करने में आने वाली समस्याओं का अध्ययन कर करके उनके समाधान के लिए कार्य कर रहा है हरियाणा विज्ञान मंच का प्रयास है कि लोग  न्यूट्रिटिव किचन किचन गार्डनिंग को इस तरह  लागू करें जैसे  लोग अपने शरीर को  स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम करते हैं हमारा प्रयास है कि  लोग न्यूट्रिटिव  गार्डनिंग को अपने जीवन का अंग बनाएं गांव पाड़ा  बम रेडी बासा पक्का खेड़ा कुर्लन इत्यादि गांवों में नीलगाय ज्यादा संख्या में होने की वजह से कम किसान किसान खेतों में सब्जी लगते हैं गांव  पाढ़ा  के एक प्रगतिशील किसान ने नीलगाय से बचाव के लिए अपने खेत में दो कनाल क्षेत्र की वार् बंदी की है किसान ने बाउंड्री पर गन्ने की फसल लगाई है हमारे प्रदेश में यदि 80%  किसान दो कनाल क्षेत्र को सब्जी व दाल वाली फसलों के लिए सुरक्षित रख ले इससे हमारे प्रदेश में 3 एकड़ क्षेत्र अपने आप फसल विविधीकरण  में आ जाएगा हरियाणा सरकार मेरा पानी मेरी विरासत के अधीन धान  के स्थान पर कोई दूसरी फसल लेने पर ₹7000 प्रति एकड़ अनुदान देती है यदि सरकार खेत की बाढ़ फेंसिंग के रूप में आर्थिक मदद करें इस से स्थाई फसल विविधीकरण होगा उपरोक्त किस ने   सब्जियों के अलावा मसाले व  दाल वाली फसले भी लगाई हुई है  इस प्रकार खेड़ी मुनक में दो महिलाओं ने मिलकर सब्जी लगाई हुई है

[12/11, 11:03 am] Rajender Singh Karnal: हरियाणा विज्ञान मंच की जिला टीम करनाल की तरफ से सभी लोगों को दिवाली त्योहार पर शुभकामनाएं विश्व में  दिवाली ऐसा त्यौहार है जिसे सभी लोग खुशी से अपने घरों पर मानते हैं लेकिन यदि हम त्योहार मनाने में भी एक है तो हमें अपनी इस एकता को कायम रखने के लिए उन खतरों के बारे में गहराई से मंथन करना चाहिए जो हमारी एकता को तोड़ते हैं हमारे देश में जातिवाद धार्मिक पहचान सदियों से चली आ रही प्रक्रिया है  इसे समाप्त करना आसान कार्य नहीं है लेकिन अब हमारे सामने जातिवाद धार्मिक आधार पर भेदभाव इतना खतरनाक रूप में सामने आ रहा है यदि ध्यान नहीं दिया तो  हमारे देश की एकता के लिए  गंभीर खतरा बन जाएगा जैसा खतरा फिलिस्तीन व इजरायल में युद्ध में देखने को  देखने को मिल रहा है  उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक प्राइवेट स्कूल में  एक अध्यापिका द्वारा एक विशेष समुदाय के छात्र को कक्षा में एक दूसरे समुदाय के बच्चों के हाथों पिटवाना एक अति गंभीर मामला है माननीय उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश  सरकार के प्रति प्रश्न खड़े किए हैं की वे इस   जहरीली नफरत की सोच  का  बच्चों में विकसित होने में रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पालन नहीं कर रही है उच्चतम न्यायालय ने सामाजिक विज्ञान संस्थान टाटा मुंबई के समाज विज्ञानियों की ड्यूटी लगाई गई है कि वे अध्ययन करके इस नफरत की सोच को  बच्चों में रोकने के   उपाय करें मैंने आज दिवाली के दिन यह पोस्ट लिखना इसलिए जरूरी समझा क्योंकि मैं अपनी प्राथमिक पढ़ाई से लेकर ग्रेजुएशन तक अपनी क्लास मे अकेला सिख धर्म में विश्वास रखने वाला  छात्र रहा हूं मेरे को अपने पूरे छात्र जीवन व नौकरी के दौरान मेरे साथियों ने अपने व्यवहार से कभी अकेलापन अनुभव नहीं होने दिया उन्होंने मेरे जीवन में ऐसे आदर्श का विकास किया जो समाज के संकीर्ण विचार रखने के रखने वाले लोगों को भी प्रेरणा देता है  मेरे को कई वर्षों तक अपने विभागीय संगठन तथा सर्व कर्मचारी संघ का अध्यक्ष बनाया जाता रहा है मुझे अपने सेवा काल में जिला  पानीपत में 1995- 96 में  मुख्यालय  मछरोली पर कार्य करने का अवसर मिला  ड्यूटी के दौरान जिला मुख्यालय पर  एक वरिष्ठ कर्मचारी के साथ  अधिकारी के विवाद की वजह से वर्ष 1995- 96 में आंदोलन करना पड़ा उस दौरान उस अधिकार ने मेरे क्षेत्र  मछरोली के किसानों को अपने लिए समर्थन मांगा कि मैं आपकी जाति से संबंध रखता हूं जबकि आंदोलन का नेतृत्व करने वाला नेता एक दूसरे समुदाय का व्यक्ति है इसलिए आपका कर्तव्य बनता है कि आप अपने अधिकारी का विरोध करें लेकिन मछरोली  क्षेत्र के लोगों ने उसके प्रस्ताव को केवल ठुकराया ही नहीं उसके खिलाफ आंदोलन में कर्मचारियों का बढ़-चढ़कर अपने साथी का साथ दिया वहीं से मेरे अंदर यह विचार एक ताकत बना कि यदि ड्यूटी क्षेत्र के लोग आपके साथ हैं आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता ऐसा ऐतिहासिक रूप में सही साबित हुआ है मैंने संकीर्ण विचारों के लोगों को हमेशा यह संदेश दिया की  इंसान  की सोच व उसकी ड्यूटी के प्रति समर्पित भावना लोगों का दिल जीतने की सबसे बड़ी ताकत है संयुक्त किसान मोर्चे के किसान आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि सभी खेती से संबंधित सभी समुदायों की आपसी एकता का लगातार विकास होना  लेकिन हमें मुजफ्फरनगर जैसी  घटना के प्रति भी सचेत रहना है  हमारे प्रदेश से  हजारों बच्चे विदेश में जा रहे हैं यदि हम मुजफ्फरनगर के स्कूल की तरह  दूसरे समुदाय के बच्चों के साथ व्यवहार करेंगे हम अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण कैसे दे सकेंगे संकीर्ण सोच का व्यक्ति हमेशा मानसिक तनाव में रहता है हम बच्चों को ऐसे तनाव के दौर में आने से बचाए  सभी त्योहार आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं इसके साथ हमें नफरत फैलाने  वालों के प्रति भी सचेत रहना पड़ेगा  ताकि समुदाय की एकता बनी रह सके धन्यवाद  डॉक्टर राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य  हरियाणा विज्ञान मंच

[13/11, 8:35 am] Rajender Singh Karnal: राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान  करनाल  ने हरियाणा विज्ञान मंच के सहयोग से गांव पाड़ा खंडअसंद  में आयुर्वेदिक  दिवस मनाया  उपरोक्त कार्यक्रम में गांव बम्हेड़ी के सरपंच अजय कुमार व गांव पाड़ा के सरपंच चौधरी दीपक हरियाणा विज्ञान मंच जिला टीम की सदस्य डॉ राजेंद्र सिंह  देशराज अलावाला नीलम व पूजा ने भी भाग लिया कृषि विज्ञान केंद्र राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल से डॉक्टर पंकज कुमार सारस्वत ने  बताया कि हमारे ग्रामीण क्षेत्र में आयुर्वेदिक तरीके से शारीरिक बीमारियों व पशुओं का इलाज सदियों से होता आ रहा है  अब भी बड़ी संख्या में लोग आयुर्वेदिक पद्धति से स्वास्थ्य की रक्षा व बीमारियों का इलाज करते हैं प्राकृतिक खेती व आयुर्वेद का आपसी गहरा रिश्ता है इन की  तरफ ध्यान विमुख होने की वजह से आज मानव व पशुधन कई प्रकार की समस्याओं के जाल में फंसा हुआ है इसमें से  निकलने का एक ही रास्ता है कि हम अपनी पुरानी पद्धति आयुर्वेदिक व प्राकृतिक खेती को  अपनाने का कष्ट करें आम लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए  आयुर्वेदिक दिवस पूरे देश में मनाया जा रहा है डॉक्टर  मनीष कुमार ने बताया कि  किसान फसलों में मल्चिंग का सदियों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं  धान के  अवशेषों  में ही गेहूं की फसल की   हैप्पी सीडर से बिजाई करने पर गेहूं की फसल फरवरी मार्च में टर्मिनल हिट के प्रभाव से मुक्त रहती है  पाड़ा गांव के सरपंच चौधरी दीपक ने राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल के द्वारा   गांव में  प्राकृतिक खेती के प्रयोग करने का स्वागत किया इससे आसपास के गांव के किसानों को भी लाभ होगा नीलम ने बताया कि हमारे गांव में गौशाला की मदद से प्राकृतिक खेती के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जीवामृत तैयार किया जाएगा जिससे   किसानों की कृषि लागत घटने  के साथ गांव की महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा हरियाणा विज्ञान मंच के राज्य कमेटी सदस्य डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल से आए वैज्ञानिकों सरपंच  किसानों व महिलाओं के प्रति कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया डॉ राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य हरियाणा विज्ञान मंच

[14/11, 8:46 am] Rajender Singh Karnal: हिंदी के प्रतिष्ठित  अखबार  जनसत्ता में श्री अरविंद कुमार मिश्रा का चुनौती बनते बेसहारा पशु संपादकीय छपा है जिसमें सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं की वजह से  जनमानस की दुर्घटनाएं व किसानों  की फसलों में होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है लेकिन किसी समस्या को उजागर करने के साथ उसके समाधान के बारे में भी जरूर लिखना चाहिए क्योंकि समस्याएं तो सभी को दिखाई देती हैं हजारों लोग  रोजाना समस्याओं को जोर- शोर से उठते हैं लेकिन जब करने की बात आती है वे  कहीं नहीं दिखाई देते जैसा  उत्तर भारत में प्रदूषण की समस्या पर दिखाई दे रहा है हमारे देश के प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् का मानना है की पैदा होने वाली कोई भी चीज व्यर्थ नहीं है केवल उसको रीसायकल व सदुपयोग  करने की आवश्यकता है मध्य प्रदेश के इंदौर  में शहर का पूरा कूड़ा  कचरा लोगों को रीसायकल के माध्यम से बिजली व कंपोस्ट खाद उपलब्ध करा रहा है इसलिए इंदौर शहर  स्वच्छता में देश में प्रथम स्थान पर है  हरियाणा विज्ञान मंच की जिला टीम करनाल  ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए घरौंडा व पाड़ा में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से संबंधित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा गायों के गोबर व मूत्र से जीवामृत तैयार  कराकर किसानों को गेहूं की फसल में पहली सिंचाई पर  डलवाने  का निर्णय लिया है प्राकृतिक खेती के लिए विश्व में प्रतिष्ठित गुरुकुल कुरुक्षेत्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर हरिओम ने 200 लीटर जीव अमृत गेहूं में प्रथम सिंचाई के साथ डालने की सिफारिश की है   मंच ने किसानों  को सप्लाई किए जाने वाले जीवामृत  का किसानों से शुल्क लेने का निर्णय लिया है मंच को शुल्क लेने का निर्णय  इसलिए लेना पड़ा   की किसान फ्री की चीज की  अहमियत बहुत कम समझते हैं  उसे गंभीरता से लागू भी नहीं करते हैं इसका दूसरा कारण जीवामृत तैयार करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए न्यूनतम आय का प्रबंध करना हमारा मानना है की आने वाले समय में सरकार की मदद से यह स्थाई रोजगार की जगह आसानी से ले सकता है इससे  किसानों व गौशाला के प्रबंधकों के बीच जीवंत संबंध बनेंगे क्योंकि हमारी गौशालाएं आसपास की खेती पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं  हरियाणा विज्ञान मंच की टीम जिला मुजफ्फरनगर के उस गांव का भ्रमण करेगी जिसमें  गांव के एक मजदूर ने सड़कों पर घूम रही भूखी प्यासी आठ गायों को अपने बाड़े में बांधकर  उनके गोबर  व मूत्र से जीवामृत तैयार करके किसानों को देता है जिस से गायों के लिए चारे व उसकी मजदूरी का खर्चा किसानों को जीवामृत देने से  हासिल हो जाता है तथा किसानों की फसले आवारा पशुओं द्वारा नुकसान से भी बचाती है उनके इस   कार्य की  गांव के सभी लोग बढ़ाई करते हैं तथा उन्हें V I P जैसा  सम्मान देते हैं भविष्य में इस तरह के  सफल मॉडल हर गांव में बन सकते हैं है डॉ राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य हरियाणा विज्ञान मंच

[16/11, 8:02 am] Rajender Singh Karnal: माननीय उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकारों द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन  में किए जा रहे कार्य के प्रति असंतोष व्यक्त किया है की  हमारे कृषि वैज्ञानिक व खेती से संबंधित विभागों द्वारा कई वर्षों से लगातार किए जा रहे प्रयासों से एनसीआर में  जनता को प्रदूषण से निजात नहीं दिला   पाए हैं  केंद्र सरकार राज्य  सरकार के प्रतिनिधियों  व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिषद नई दिल्ली के अंतर्गत  संस्थान द्वारा 25 अक्टूबर को इसी विषय पर गंभीर मंथन से  तथा  उच्चतम न्यायालय के निर्देश से  यह तथ्य सामने आया है कि हमें फसल अवशेष प्रबंधन पर खुले मन से दोबारा विचार करना चाहिए की हमारे से कहां कमी रही है भारत सरकार द्वारा बहुत ज्यादा अनुदान देने के बाद भी किसान फसल अवशेष जलाने को क्यों नहीं छोड़ रहे हैं क्या इसका और भी कोई विकल्प हो सकता है इस पर भी चिंतन वक्त की मांग है  हरियाणा विज्ञान मंच का बुनियादी सिद्धांत है की सच्चाई  जमीनी हकीकत व संबंधित स्टेकहोल्डर के शामिल किए बिना हम  मन माफिक परिणाम की अपेक्षा नहीं कर सकते हरियाणा विज्ञान मंच ने इस सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन के क्या-क्या तरीके त हो सकते हैं इस पर अध्ययन किया है धान  की  कंबाइन से कटाई के उपरांत उस क्षेत्र के गरीब मजदूरों द्वारा बचे हुए अवशेषों को पशुओं    के चारे  के लिए इस्तेमाल पर अध्ययन किया है हमारे को बहुत उत्साह जनक संकेत मिले हैं कई पशुपालकों का कहना है कि हम दो महीने से दो दुधारू पशुओं को डंठल खिला रहे हैं हमारे पशुओं के दूध में कोई कमी नहीं आई है कुछ पशुपालकों का यहां तक भी कहना है कि  डंठल  खिलने से दुधारू पशुओं के दूध में बढ़ोतरी हुई है किसानों का यह भी कहना है की मनरेगा को इससे जोड़ दिया जाए तो इससे दोहरा लाभ होगा  किसानों को फसल अवशेषों से निजात मिलेगी किसान उसे खेत में  जीरो ट्रेलर मशीन से गेहूं की बिजाई आसानी से कर सकेगा दूसरा गरीब मजदूरों को पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होने के साथ उन्हें रोजगार भी मिलेगा धन्यवाद डॉ राजेंद्र सिंह राज्य कमेटी सदस्य हरियाणा विज्ञान मंच

[19/11, 10:24 am] Rajender Singh Karnal: आदरणीय  सेतिया जी मैं आपके विचार से पूरी तरह सहमत हूं हरियाणा विज्ञान मंच की जिला टीम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए कार्य कर रही है इसी दौरान हम उन्हें एहसास  करते हैं की आत्मनिर्भर  बनने व भोजन ईंधन स्वास्थ्य पढ़ाई लिखाई अथवा धार्मिक तीर्थ स्थान की यात्रा सभी के लिए  सरकार पर पूरी तरह  निर्भर होना  हमारी गरिमा व एक  सम्मानपूर्वक जीवन पर कितना असर डालता है यह भी हमें अनुमान लगाना चाहिए यदि सरकार ऐसी नीतियां बनाई  जिनके द्वारा गरीब लोगों को रोजगार मिले रोजगार मिलने के उपरांत वे सरकार के वेलफेयरीज्म पर कम निर्भर रहेंगे राज्य सरकारों का ज्यादा बजट  वेलफेयरीज्म स्कीम पर खर्च हो रहा है तथा नए रोजगार कैसे विकसित होंगे जब उनके लिए बजट ही नहीं है हरियाणा  विज्ञान मंच ने किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाने  के लिए इस्तेमाल होने वाले जीवामृत का स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार करने का निर्णय लिया है क्योंकि   किसान  जीवामृत तैयार करने में कठिनाई अनुभव करते हैं इसलिए सरकार के प्रचार के बावजूद प्राकृतिक खेती  को   किसान अपना नहीं रहे हैं  मंच ने 200 लीटर जीवामृत के ₹1500 किसानों से  शुल्क के रूप में लेने का निर्णय लिया है जिसमें से ₹500 जीव अमृत तैयार करने का खर्च आएगा तथा ₹1000 जीवामृत को तैयार करने वाली महिलाओं को दिया जाएगा ऐसा करने से किसान का खाद का खर्च घटने के साथ किसान की भूमि भी उपजाऊ बनेगी गांव की गरीब महिलाओं को रोजगार मिलेगा ऐसे विकास से दोनों के साथ  देश की  अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी  लेकिन मौजूदा सरकार जीवामृत तैयार करने का कारखाना लगा देगी जो ऑटोमेटिक मशीनों से चलेगा जो ऑटोमेटिक मशीनों से चलेगा जिसमें केवल  50 लोगों को काम मिलेगा तथा वह जीवामृत  10 जिलों में सप्लाई होगा यह हमारे देश  के आर्थिक विकास का नया मॉडल है हरियाणा विज्ञान मंच के विजन के अनुसार  करने से एक लाख महिलाओं को  बहुत कम बजट पर रोजगार मिल सकता है पर ऐसा नहीं होगा  क्योंकि सभी  राजनीतिक पार्टियों  बहुराष्ट्रीय कंपनियों व  उद्योगपतियों के द्वारा जारी इलेक्टरेट बैंड पर निर्भर है पर निर्भर है इलेक्ट्रिक बंद पर निर्भर है